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Tuesday, January 9, 2018

प्रदीप प्रियदर्शी

उपन्यासकार प्रदीप प्रियदर्शी के बारे में कोई विशेष जानकारी तो उपलब्ध नहीं है।
   कुछ पाठक मित्रों से मिली जानकारी के अनुसार ये विजय- रघुनाथ सीरीज के उपन्यास लिखते थे।

प्रदीप प्रियदर्शी के उपन्यास
1. खून बोलता है।

Saturday, January 6, 2018

एस. कुमार

एस. कुमार का एकमात्र उपन्यास जो मुझे उपलब्ध हुआ है वह है फंदेबाज।
   एस. कुमार को और कोई विशेष परिचय नहीं मिलता।
इस उपन्यास का काॅपीराइट अधिकार उपन्यासकार राज भारती के पास है और लेखक का पता भी राज भारती के निवास स्थल का है।
राज भारती और एस. कुमार में क्या संबंध है इस विषय पर कोई भी जानकारी अभी तक उपलब्ध नहीं है।

एस. कुमार के उपन्यास
1. फंदेबाज ( सपना पॉकेट बुक्स- दिल्ली)
2. काले चेहरे

संपर्क पता-
एस. कुमार
वी- 198, पटेल नगर
नयी दिल्ली- 110008

सुनील पण्डित

सुनील पण्डित के बारे में अभी तक कोई विशेष जानकारी उपलब्ध नहीं है।

सुनील पण्डित के उपन्यास
1. जेल का पंक्षी (सपना पॉकेट बुक्स- दिल्ली)
2. जुर्म का पण्डित

शिवा पण्डित

ट्रेड नाम के दौर में एक नाम है शिवा पण्डित। वेदप्रकाश शर्मा के प्रसिद्ध पात्र केशव पण्डित के पश्चात असंख्य पण्डित उपन्यास जगत में दिखाई दिये। और जितने भी दिखाई दिये सब के सब प्रकाशन संस्थानों द्वारा पैदा किये गये ट्रेड नाम है।
  शिवा पण्डित उपन्यासकार का प्रसिद्ध पात्र है अर्जुन त्यागी। ये अर्जुन त्यागी को नायक बनाकर उपन्यास लिखते हैं।
शिवा पण्डित के जन्मदाता रवि पॉकेट बुक्स है।

शिवा पण्डित ने उपन्यास
1. कुत्ते की पूंछ
2. निशाचर

मल्लिका जोशी

मल्लिका जोशी नामक उपन्यासकार झझर (हरियाणा) की निवासी है।
‌मल्लिका जोशी का प्रथम उपन्यास रवि पॉकेट बुक्स से प्रकाशित हुआ। इनके अन्य उपन्यासों की कोई भी जानकारी उपलब्ध नहीं है।

मल्लिका जोशी के उपन्यास
1. सबसे बङा शिकारी

Sunday, December 17, 2017

गजाला-प्रथम भारतीय हिंदी जासूसी महिला उपन्यासकार

गजाला करीम लोकप्रिय उपन्यास जगत का एक वह नाम है जिसने कम समय में ही अपनी एक अलग पहचान स्थापित कर ली थी।
     स्वर्गीय वेदप्रकाश शर्मा की इस शिष्या ने बाल्यावस्था में ही जासूसी उपन्यास लेखन का शुभारंभ कर दिया और कम समय में ही प्रसिद्धि प्राप्त कर ली।
स्वयं वेदप्रकाश शर्मा जी ने गजाला जी के बारे में लिखा था, -" यह गर्व की बात है कि भारत की पहली महिला जासूसी उपन्यासकार मेरठ शहर की है। गजाला मुझे अपना गुरु मानती है, मैं इस काबिल नहीं हूँ । जब‌ मैंने उनमें लिखने की प्रतिभा और जज्बा देखा, तो उन्हें लेखन के कुछ गुर बताये थे। उन्होंने अभी तक जितने भी उपन्यास लिखे हैं, उनमें से कुछ मैंने पढे हैं। उनमें कथानक चयन की सलाहियत मौजूद है। दरअसल, जासूसी लेखन वो विधा है, जिस पर हमेशा से ही, खासकर भारत में पुरुषों का एकाधिकार रहा है। गजाला ने यह साबित किया है कि भारत कि महिलाएं भी जासूसी उपन्यास लिख सकती हैं।"
      
   बाल्यावस्था का फायदा प्रकाशकों ने इस तरह से उठाया की गजाला जी की प्रतिभा का इस्तेमाल गलत रूप से किया गया। इनके प्रारंभिक उपन्यासों को किसी और के नाम से प्रकाशित किया गया लेकिन प्रतिभा आखिर कहां तक छुपी रहती।
           कुछ पाठकों को इनके उपन्यासों के नाम पर आपत्ति हो सकती है लेकिन इनके उपन्यासों के नाम भी प्रकाशक महोदय अपने लालच के लिए बदल देते थे।
वेदप्रकाश शर्मा जी ने अपने उपन्यासों में‌ अश्लीलता का हमेशा विरोध किया है और फिर उनकी शिष्या के उपन्यासों में अश्लील कहां हो सकती है। सिर्फ उपन्यासों के शीर्षक जो कुछ उत्तेजक नजर आते हैं वह सिर्फ प्रकाशकों की देन है।
        कुछ विशेष वजह से गजला जी ने उपन्यास जगत से दूरी बना ली।
हमारी गजाला जी से यही प्रार्थना है की वे पुन: लेखन क्षेत्र में सक्रिय हों।
  अगर आप गजाला जी के बारे में जानाना चाहते हैं तो निम्न लिंक से उनकी आत्मकथा डाउनलोड करके पढें।
  अगर आप गजाला जी से संबंधित कोई भी प्रश्न करना चाहते हैं तो ब्लॉग के कमेंट बाॅक्स में लिखें।
गजाला करीम की आत्मकथा यहाँ उपलब्ध है।
क्लिक करें- आत्मकथा
नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें।


Thursday, December 7, 2017

प्रथम उपन्यास

लेखक नाम     -                   उपन्यास नाम

अमित खान-              तिलक रोङ का भूत
( करण सक्सेना सीरिज, 1993, सुमन पॉकेट बुक्स)

2. परशुराम शर्मा -        चीखों का संसार

3. गजला -                    तुरूप का पत्ता

4. वेदप्रकाश शर्मा-        दहकते शहर
    अंतिम उपन्यास-        भयंकरा

5. अनिल मोहन -          अनोखी दुल्हन