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Friday, November 24, 2017

राज भारती

अपडेट जारी...
कमलकांत सीरिज
1. तिगनी का नाच
2. तेरी गर्दन मेरे हाथ
3. त्रिशूल
4 मौत खङी तेरे द्वार
5. विष क्या
6. हिसाब बराबर
7. कातिल माने ना
8. काम तमाम
9. सारे दिमाग मेरे शिकार
10. दिल तो कातिल है
अग्निपुत्र सीरिज

1. मायाजाल
2. महादण्ड
3. खुदा का बेटा
4. महाबली
5. महाक्रोधी
6. महारथी
7. महायोगी
8. महामंत्र
9. महाकाल
10. महादाह
11. महामंत्र
12. महापाप
13. महाविनाश
14. महासंग्राम
15. महाकुण्ड
16. अग्निपुत्र
17. रक्तपात
18. रक्तधारा
19. मिस्त्री शहजादी
20. रक्त सिंदूर
21. रक्त सागर
22. शंग्रीला
23. रक्त पिपासु
24. रक्त रेखा
25. रक्त आहुति
26. रक्त कलश
27. रक्त-सुरा
28. रक्तांचल
39. रक्तदेव
30. रक्त -भैरवी
41. रक्त-मंथन
42. मृत्युराग
43. मृत्युदंश
44. मृत्युधाम
45. मृत्युजाल
46.. मृत्युरथ
47. मृत्युद्वार
48. शाही रक्कासा
49. सफेद कबूतरी
50. मल्लिका का ताज
51. शाही जल्लाद
52. ताजपोशी
53. जादूगरनी
54. दोधारी तलवार
55. रक्त-मंदिर
56. तौर ग्रह के हत्यारे
57. तौर ग्रह के देवता
58. मंगोल सुंदरी
60. तौर ग्रह के छापामार
61. अभिसारिका
62. सुर्ख सैलाब
63. सरहदी भेङिये
64. शिकारी मल्लिका
65. तौर के लूटेरे
66. रेगिस्तानी कबीले की मल्लिका
67. हुंकार
68. आमरा
69. आमरा का इंतकाम
70. विनाश चक्र
71. बिल्ला हरूमा
72. शिंगूर के दरिंदे
73. शाबा
74.शंखनाद
75. महायोद्धा (65 वा उपन्यास, अग्निपुत्र)
76.
77.
78.
79.
80


उक्त लेखक के विषय में अगर किसी भी पाठक मित्र के पास कोई भी जानकारी हो तो हमें भेजने का कष्ट करें।
- गुरप्रीत सिंह
     - 9509583944
Email- sahityadesh@gmail.com

Thursday, November 9, 2017

रवि माथुर

रवि माथुर

रवि माथुर के उपन्यास
1. आखिरी औरत
2. हत्यारे हाथ
3. जहरीले होंठ
4. अंधा सौदा
5. जीने का हक
6. कत्ल के बाद
7. जिंदगी का जहर
8. तेरह जून की रात    (थ्रिलर विशेषांक)
9. नरम गोश्त
10. लोहे के कंगन        (थ्रिलर विशेषांक)
11. हत्यारी हड्डी
12. डिब्बा बंद लाशें  (थ्रिलर विशेषांक)
13. कानून का पुतला ( थ्रिलर विशेषांक)
14. इंसाफ का खुदा
15. कब्र का बिज्जू
16. नर्क का शैतान
17. कांपता शहर       ( थ्रिलर विशेषांक)
18. शहरी गुण्डे          ( थ्रिलर विशेषांक)
19. जादूगरनी का जाल
20. कांटों का ताज  (क्रम 01 -20 तक, थ्रिलर सीरिज)
21. मनहूस मखौटा     (सुंदरी सीरिज)
22. मुसीबत का मारा  (सुंदरी सीरिज)
23. मोम का मुर्दा        (सुंदरी सीरिज)
24. दर्द की दहशत      (राजा-लैला सीरिज)
25. दांत का जहर       (राजा-लैला सीरिज)
26. मानव बम            (राजा-लैला सीरिज)
27. फिरौती का फंदा    (राजा-लैला सीरिज)
28. ब्राउन शुगर          (राजा-लैला सीरिज)
29. लाल बादशाह       (राजा-लैला सीरिज)
30.
उपर्युक्त सभी उपन्यास दुर्गा पॉकेट बुक्स मेरठ से प्रकाशित हैं।

रवि माथुर
428/15 B,
ईश्वरपुरी, मेरठ- 250002

Wednesday, November 8, 2017

नये उपन्यास

नमस्कार मित्रो,
  इस पोस्ट के माध्यम से कुछ नये उपन्यासों की चर्चा की जा रही है जो शीघ्र बाजार में उपलब्ध होंगे।

1. ए टेरेरिस्ट- इकराम फरीदी।
      इकराम फरीदी का नया उपन्यास ए टेरेरिस्ट रवि पॉकेट बुक्स से बाजार में उपलब्ध हो गया है।
  फरीदी जी का ' गुलाबी अपराध' का भी शीघ्र रिप्रिंट बाजार में उपलब्ध होगा।
2. मिशन आश्रम वाला बाबा- टाइगर।
     हरियाणा निवासी टाइगर (JK VERMA) का उपन्यास ' मिशन आश्रम वाला बाबा' की स्क्रिप्ट प्रकाशक के पास भेज दी गयी है, जो की शीघ्र बाजार में उपलब्ध होगा।
पाठकों को इस उपन्यास का काफी लंबे समय से इंतजार था।
प्रकाशक- राजा पॉकेट बुक्स

3. वीर की विजय यात्रा- दिनेश चारण।
     दिनेश चारण का ऐतिहासिक फिक्शन वीर की विजय यात्रा सूरज पॉकेट बुक्स से अतिशीघ्र बाजार में आने को तैयार है।
ध्यान रहे की दिनेश चारण का यह उपन्यास ONLINE प्रकाशन के रूप में काफी समय से चर्चा में है। प्रिंट रुप में पाठकों के समझ पहली बार आ रहा है ।

4. वन शाॅट - ली चाइल्ड (अनुवाद)
     प्रसिद्ध अनुवादक शबा खान जी द्वारा ली चाइल्ड के प्रसिद्ध अंग्रेजी उपन्यास का हिंदी अनुवाद सूरज पॉकेट बुक्स ला रहा है।

5. मुर्दे की जान खतरे में - अनुराग कुमार जीनियस
   अनुराग कुमार जीनियस का बाल उपन्यास हिंदुस्तान पेपर बुक्स से शीघ्र बाजार में उपलब्ध होगा।
इसके अलावा अनुराग जी का एक उपन्यास सूरज पॉकेट बुक्स से भी आने वाला है।

6. अगिया बेताल- परशुराम शर्मा
अपने समय के बहुचर्चित उपन्यासकार परशुराम शर्मा का उपन्यास 'अगिया बैताल' का रिप्रिंट सूरज पॉकेट बुक्स ला रही है। यह एक हाॅरर उपन्यास है।

Saturday, November 4, 2017

अरुण अंबानी

कानपुर के निवासी अरुण अंबानी लोकप्रिय उपन्यास जगत में जासूसी उपन्यास लेखक थे।
  इनका एक प्रसिद्ध पात्र था रंजन दूबे
रंजन दूबे:-
   महाहरामी, महाशातिर, महामक्कार, इक्कीस कत्ल करने के बाद उसने कत्लों की गिनती करनी छोङ दी थी।  इनके बारे में एक बात मशहूर है कि सांप पर विश्वास कर लेने वाला तो हो सकता है एक बार जिंदा बच सकता है, लेकिन रंजन दूबे पर विश्वास किया, वो तो मरा ही मरा।

  इनके उपन्यासों से संबंधित हालांकि अभी तक कोई विशेष जानकारी प्राप्त नहीं हो पायी।
इनके उपन्यास सूर्या पॉकेट बुक्स से प्रकाशित हैं।

अरुण अंबानी के उपन्यास
1. खलीफा
2. खजाने का साँप
3. दौलत सबकी दुश्मन
4. मौत का ताज
5.

संपर्क लेखक-
अरुण अंबानी
339/12,
बापू नगर, कानपुर।

- उक्त लेखक के विषय में अगर किसी के पास कोई भी जानकारी हो तो हमसे अवश्य शेयर करें।
- 9252829634

प्यारे लाल आवारा - संस्मरण

प्यारे लाल 'आवारा ' - संस्मरण

इलाहाबाद के कीडगंज में निवास और प्रकाशन था । अत्यन्त निर्धन , बैकवर्ड क्लास परिवार में जन्म हुआ था।
      सिरकी  बाँस को छीलकर उसके परदे बनाना उनके परिवारी जनों का कार्य था। जब मैं उनके सम्पर्क में आया तो वे बी.ए. पास, चालीस साल के करीब सुखी परिवार वाले थे, पर बहुत अमीर नहीं।
   रूपसी प्रकाशन, बिरहाना रोड, कीडगंज , इलाहाबाद पता लिखा जाता था। उस दौर में निकलने वाले नाॅवल,जासूसी सामाजिक सभी मैगज़ीन कहलाते थे। हर माह निश्चित तिथि को निकलते थे। ज़रूरी इसलिए होता था क्योंकि पोस्टल सुविधा प्राप्त होती थी। बंडल बनाकर,पोस्ट आफिस से आए बैगो में भरकर, रिक्शे पर लादकर पोस्ट आफिस ले जाने कि प्रक्रिया अपनाई जाती थी । एक रूपया पच्चीस पैसे व पचहत्तर पैसे, इस दो कैटेगरी में मैगजीन होती थी।  प्यारे लाल जी के यहाँ से एक उनका लिखा उपन्यास हर माह रूपसी(पत्रिका) में निकलता था, दो अन्य पचहत्तर पैसे वाली मैगज़ीने -- रहस्य व रोमांच होती थी।
       प्यारे लाल जी खुद प्रकाशन के काम में दखलअंदाजी करना पसन्द न करते थे। मालिक वे ही थे, पर सारा काम उन्होंने अपने छोटे भाई श्याम लाल को सौंप रखा था। वे सुबह आठ बजे सोकर उठने के बाद नीचे आफिस में आते थे । आफिस,एक तरह से उनकी बैठक थी। जब तक वे बैठक में हैं,बैठक चलती रहती थी। बैठक खाली है तो मानिये प्यारे लाल जी नहीं है। रिक्शे पर घूमने, मिलने- जुलने निकल गये। निकल गये तो निकल गये, कोई बता नहीं सकता कि कब आयेंगे।  रिक्शे के अलावा कोई और सवारी का साधन उन दिनों न था। कार, स्कूटर ,मोटर साइकिल...राम का नाम लीजिए , या तो साईकिल कुछ अच्छी हैसियत तो रिक्शा । मैं सन् साठ- पैंसठ की बात कर रहा हूँ। बड़े सादा मिजाज़, लम्बे बाल पीछे को काढ़े हुए। एक बार कंघा मारकर ऊपर से उतर आए तो फिर सारा दिन हाथ से या झटककर बालों को ऊपर ले जाने का खुद का स्टाइल।  चौड़ी मोहरी का पायजामा, लम्बा साफ़-सफ़्फाफ़ कुरता, पैरों में काली, अँगूठे वाली चप्पल । सफेद कुरते- पायजामे से हमेशा एक सा प्यार। कभी किसी और पोशाक में नहीं देखा । घर- आफ़िस में हैं तो लिज़मिज़ा कुरता- पायज़ामा भी चलेगा।  बाहर जा रहें हैं तो इस्त्री युक्त। कपड़े घर मे धुलते थे, इसकी सनद यह की बालकनी मे हर दिन धुला कुरता- पायजामा एक जोड़ी सूखता नज़र आता था। कुरता- पायजामा मोटे सूत का। जाड़े में भी वही पोशाक, अलबत्ता बस खादी की जैकेट का इज़ाफा हो जाता था।
     ‌कद लम्बा, छ: फुट से निकलता हुआ,  दो-तीन इँच ऊपर । सनद यह है कि जब उनके करीब जाकर खड़ा होता तो उनके कंधे तक खुद को आँकता।
    जब मैं उनके पास जाता-आता था तो एक नौ-दस वर्षीय पुत्री के पिता थे। पुत्री का नाम नीता। मैं सुबह आठ बजे पहुँचा नहीं कि वे उतरकर आ रहे होते या मिनट दो मिनट बाद आ जाते। गुरू- शिष्य की गरिमा युक्त औपचारिकता का निर्वाह। मेज के पीछे हमेशा एक जगह मौजूद कुर्सी पर आसीन होते ही हल्की आवाज़ में पुकार--" श्याम... "
और मैंने हाथ बढ़ाकर कहा--" मैं लाता हूँ। "
उन्होंने नोट बढ़ाया और मैं सिगरेट लेने के लिए क़दम बढ़ाए। विल्स सिगरेट पीते थे। मैंने पैकेट लाकर दी , सिगरेट शुरू।
फिर आवाज़ दी,"नीता "
नीता चाय के दो कप के साथ हाज़िर। एक कप मेरी ओर बढ़ाई , दूसरी खुद शुरू। इस तरह शुरू हुई गुरू जी की दिनचर्या। रात को लिखते थे। कभी सारी-सारी रात, इस बात की चुगली उनकी सुबह आँखों की सुर्खी, सोई- सोई आँखें कर देती थीं। शाम को सिविल लाइन स्थित काफी हाउस में जाना ज़रूरी होता था। उस दौर में सैकड़ों साहित्यकार के रूप मे ख्याति प्राप्त हो, लुगदी साहित्य का यशस्वी कथाकार हो, कवि हो या राजनीति का नया-पुराना खिलाड़ी...काफी हाऊस में देखा जाना शान की बात समझता था ।....आगे फिर कभी..

@ आबिद रिजवी जी के स्मृति कोष से।

आबिद रिजवी©
- लेखक, प्रकाशक की अनुमति के बिना इस आलेख का अन्यत्र किसी भी प्रकार का प्रकाशन अमान्य और कानूनन अपराध है।

Saturday, October 28, 2017

विशाल

विशाल नामक उपन्यासकार के विषय में अभी तक कोई विशेष जानकारी उपलब्ध नहीं हो पायी।

विशाल के उपन्यास
1. वह देवी थी (सुबोध पॉकेट बुक्स)

कुसुम गुप्ता

कुसुम गुप्ता के विषय में अभी तक कोई विशेष जानकारी उपलब्ध नहीं हो पायी।

कुसुम गुप्ता के उपन्यास
1. लाश की गवाही ( सुबोध पॉकेट बुक्स)