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Monday, August 14, 2017

नरेन्द्र नागपाल

नरेन्द्र नागपाल के उपन्यास इनके ब्लाग से प्राप्त हुये हैं।

नरेन्द्र नागपाल के उपन्यास
1. काली
2. नैना
3. चीलबाज
5. टाटा बाय टाटा
6. किडनी

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Sunday, August 13, 2017

विमल चटर्जी

अपने समय के प्रसिद्ध उपन्यासकार विमल चटर्जी के विषय में अभी तक कोई विशेष जानकारी उपलब्ध नहीं है। पर कुछ पुराने पाठक इनका नाम आज भी सम्मान से लेते हैं।

विमल चटर्जी के उपन्यास
1. दुश्मनों के दुश्मन
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- 9509583944
Email- sahityadesh@gmail.com

लता तेजेश्वर

समीक्षा : हवेली

प्रेम के विदरूप सच को उजागर करती :हवेली

'हवेली' लता तेजेश्वर का पहला उपन्यास है। छब्बीस अनुच्छेदों से विभक्त उपन्यास का तानाबाना एक पुरानी हवेली के इर्द-गिर्द बुना गया है जहां घटित होनेवाली अनेक घटनाओं के कारण रहस्य व रोमांच की स्थिति उत्पन्न होती है। 
उपन्यास का आरंभ अजनीश के माध्यम से होता है जो अपने इमार पिता, माँ और कॉलेज में पढ़ रहे छोटे भाई को गाँव में छोड़ कर जीवनयापन के लिए अपना रुख मुम्बई की ओर करता है। यहाँ आते ही वह ठगी का शिकार होता है लेकिन एक अजनबी उसकी मदद कर इंसानियत का परिचय देता है। ऑफिस में नौकरी पाने के बाद समुद्र तट पर एक बार फिर उसकी मुलाकात उस अजनबी से होती है जो मेयर चंद्र शेखर होते हैं। उनके परिवार में पत्नी अवनि के अलावा बेटी अन्वेशा व बेटा राहुल है। कॉलेज में पढ़ने वाली अन्वेशा को यदा कदा डरावने सपने आते रहते हैं। अन्वेशा व राहुल में आपसी बाल सुलभ नोंक झोंक चलती है। अन्वेशा को अपने कुत्ते पलटु से गहरा लगाव है। पानी में तैरने के बाद अन्वेशा की तबियत बिगड़ती है तब उनके चिकित्सक डॉ रमेश शर्मा उसके लिए किसी मनोचिकित्सक से सलाह लेने की सोचते हैं। दूसरे ओर पेशे से अध्यापिका मेहंदी मुम्बई के भीड़ भाड़ वाले इलाके में अपनी माँ गौतमी और छोटी बहिन स्वागता के साथ दो बैडरूम वाले फ्लैट में रहती है। गौतमी पहले नर्स के रूप में काम करती थी लेकिन बाद में ह्रदय रोग से पीड़ित होने पर उसे नौकरी छोड़ कर घर बैठना पड़ता है। गौतमी का पति उसे छोड़ कर चला जाता है इसलिए उसका विश्वास घात मेहंदी हर पुरुष में देखती है। स्वागता अन्वेशा के साथ ही कॉलेज में पढ़ती है। 
कॉलेज के पिकनिक के जाते समय किसी कारण कुछ बच्चे बस से उतर जाते है और जंगल में खो जाते हैं। अन्वेशा के खो की खबर पा कर चंद्र शेखर अजनीश को भेजते हैं तो स्वागत की खोज में मेहंदी चल पड़ती है। रास्ते में नोंक झोंक के बीच दोनों की मुलाकात होती है फिर वह हवेली पहुँच वहीँ रहने लगते हैं। 
हवेली में रहते हुए एक रात अन्वेशा रहस्यमय ढंग से उसके तहखाने में बेहोश मिलती है फिर ऐसे ही घटना मेहंदी के साथ भी घटित होती है। यहीं अजनीश व मेहंदी की निकटता भी बढ़ने लगती है। वहीँ अंकिता हवेली में ही आत्महत्या की प्रयास करते मेहंदी उसे बचाती है।  दोनों तरह की स्थितियों को लता ने सामने रखा है। 
मेहंदी व अजनीश के प्रेम प्रसंग के साथ ही मेयर चंद्र शेखर, उनकी पत्नी अवनि, अन्वेशा, राहुल, मेहंदी की माँ गौतमी, स्वागत के सहपाठी निखिल, सुहाना नीरज, संजय, नीलिमा, अभिषेक, जुई, प्रो.सुनील, अमृता, फातिमा, वृद्धा जैसे पात्रों के सहारे उपन्यास की कथा आगे बढ़ती है। वाचमैन, रघुकाका, पूर्णिमा, डॉ रमेश , महेश के माध्यम से उपन्यास अपने चरम तक पहुँचता है। उपन्यास में जुई एक शरारती छात्र के रूप में सामने आती है। 
उपन्यास की भाषा सरल है। और शैली में रोचकता ऐसी कि एक बार पढ़ना शुरू करते हैं तो कौतूहलवश पढ़ते ही जाते हैं। उपन्यास का आवरण अच्छा है लेकिन मुद्रण का कुछेक कमियाँ जरूर खटकती है। उपन्यास की भूमिका में प्रशिद्ध कथाकार संतोष श्रीवास्तव ने इसे विभिन्न घटनाओं से गुजरती हवेली का सच कहा है। मेरी नज़र में यही सच उसे रोचक व पठनीय बनाता है।
प्रकृति व व्यक्ति का चित्रण अनेक स्थान पर लता ने बड़े ही प्रभावी ढ़ंग से किया है -
" पत्थरों को काटते हुए नदी सरगम गया रही थी, दूर पहाड़ से गिरते हुए जल प्रपात सूर्य की झिलमिलाती हुई रंगीन किरणे उस जल प्रपात में घुल कर और भी सोभियमान दिख रही थी। सूर्य कि रश्मि जल की तरंगों में प्रतिविम्बित हो कर दूर हवेली में अपनी सुंदरता को निहार रही थी। (पृष्ठ-72)
प्रकृति से मनुष्य के सम्बन्ध व उसके प्रति गहरे अनुराग को लता भी गहनता से महसूसती है।
" प्रदूषण भरी हवा, गाड़ियों का शोर शराबा, एक दूसरे से आगे बढ़ जाने की अधीरता हमें इस सुंदर प्रकृति से दूर ले जाती है।"(पृष्ठ-74)
भले ही लता तेजेश्वर ने 'हवेली' को पूरी तरह काल्पनिक उपन्यास बनाया है और पात्रों का सच्चाई के साथ वे कोई सम्बन्ध नहीं बताती लेकिन सही मायने में देखें तो रहस्य व रोमांच के बहाने 'हवेली' प्रेम के चरम व उत्कर्ष, उसकी सफलता-विफलता विदृप सच को हमारे सामने लाने का सार्थक प्रयास है।
समीक्षक : महावीर रवांलटा
संभावना - महरगाँव
पत्रलय:मोल्टाड़ी, पुरोला
उत्तरकाशी (उत्तराखंड)

कनरल सुरेश

एक समय था जब कर्नल नाम से कई लेखक उपन्यास क्षेत्र में आये।
इसी समय एक नया नाम आया वह कर्नल न होकर कनरल था, जी हां कनरल सुरेश।
हालांकि इस लेखक के विषय में कोई जानकारी प्राप्त नहीं हो पायी।
ये राम, रहीम, लव, कुश, काला बादशाह और होगहू सीरिज से उपन्यास लिखते थे।

कनरल सुरेश के उपन्यास
1. धुंध की हत्या

परिवर्तन चौहान

नकल के बाजार में केशव पण्डित नाम से जो लहर चली उसमें कई प्रकाशन संस्थानों ने लाभ कमाया और अपने अपने छदम लेखक पैदा कर लिये।
परिवर्तन, परिवर्तन पण्डित और परिवर्तन चौहान। अगर और कोई परिवर्तन नाम से लेखक मिल जाये तो आश्चर्य नहीं।

परिवर्तन चौहान के उपन्यास
1. फंस गया परिवर्तन पाकिस्तान में।

गौरी पण्डित

हिंदी लोकप्रिय उपन्यास जगत में केशव पण्डित की लोकप्रियता को जितना भुनाया गया है उतना तो शायद विश्व इतिहास में भी किसी को न भुनाया गया होगा।
    वेदप्रकाश शर्मा के एक पात्र केशव पण्डित की नकल पर असंख्य केशव पण्डित नाम के लेखक पैदा हो गये और फिर तो नकल की नकल और फिर आगे भी नकल और नकल के साथ पैदा हुये पात्रों की भी नकल।
हद से आगे की Ghost Writing  करवायी इन प्रकाशन संस्थानों ने। अपने लाभ के लिए उपन्यास के बाजार को ही खत्म कर दिया।
   ऐसी ही एक Ghost writer है गौरी पण्डित। पता नहीं ये किस प्रकाशन संस्था की देन थी, पर थी शुद्ध छदम लेखिका। ये भी केशव पण्डित सीरिज लिखती थी।

गौरी पण्डित के उपन्यास
1. सब साले चोर हैं।

मोना डार्लिंग

हिंदी लोकप्रिय उपन्यास जगत में Ghost Writing खूब हुयी। और एक बङी बात ये भी है की महिला उपन्यासकार के नाम से भी खूब उपन्यास आये और अधिकतर में Ghost Writing हुयी थी।
इसी प्रकार की एक छदम लेखिका थी मोना डार्लिंग।
मोना डार्लिंग नाम से बाजार में खूब उपन्यास आये थे और ये पाठक की पठन क्षमता और रुपये का दोहन भी था‌।

मोना डार्लिंग के उपन्यास
1. अंगूर का दाना

राकेश अग्रवाल

राकेश अग्रवाल के विषय में अभी तक  कोई जानकारी उपलब्ध नहीं हो पायी।
इनकी उपन्यास का एक कवर चित्र मिला है, जिसके आधार पर कहा जा सकता है की ये विक्रांत, विवेक सीरिज के उपन्यास लिखते थे।

राकेश अग्रवाल के उपन्यास
1. मृत्यु चक्र

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Saturday, August 12, 2017

गोपाल शर्मा

उपन्यासकार गोपल शर्मा के बारे में कोई विशेष जानकारी उपलब्ध नहीं है।

गोपाल शर्मा के उपन्यास
1. कानून कोई खिलौना नहीं ।
2. वर्दी का नशा
3. वसीयत के हत्यारे
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9509583944
Email- sahityadesh@gmail.com

Thursday, August 3, 2017

संतोष पाठक

मनोहर कहानियां, सस्पेंश कहानियाँ जैसी पत्रिकाओं के संपादक रहे संतोष पाठक ने उपन्यास क्षेत्र में भी हाथ आजमाया था।
इनके उपन्यास जासूसी, सस्पेंश व रोमांच से भरपूर हैं।

संतोष पाठक के उपन्यास
1. अनदेखा खतरा
2. आखिरी शिकार

संपर्क
Email- skpathaknovel@gmail.com

Mob No.- 8800501416

गजल- सरला रानू

गजल- सरला रानू

मुझे जिंदगी का सबब यह मिला है,
न उन्हें कुछ गिला था न हमें कुछ गिला है।
हम रास्ते के कांटें वो गुंचे बहारों के,
सोचती हूँ शायद यही प्यार का सिला है।

दिल जिनके लिए भंवर में फंसा है,
क्या उनका दिल मेरे लिए धङकता नहीं।
वह मुझको गैर समझें या भूल भी जाएं,
मैं कैसे कहूं, दिल उनके लिए तङफता नहीं।।

             - सरला रानू
C-56, 3 floor
वेस्ट नगर नगर
नई दिल्ली-08

सरला रानू

प्रसिद्ध सामाजिक उपन्यासकार रानू की धर्मपत्नी सरला रानू ने भी  उपन्यास लेखन किया था।

सरला रानू के उपन्यास
1. चिता नहीं जलेगी
2. पाप की निशानी
3. बाप-बेटा
4. बहू नहीं, दौलत चाहिए
5. डूबते साये
6. सिंदूर से बङा
7. बेरहम
8. थके कदम
9. प्यासे सपने
10. उधार की सांसे
11. बेवफा बीवी
12. काजल और कफन
13. साजन का प्रतिशोध
14. आकाश गंगा
15. वक्त का फैसला
16. गुनाहों के साये
17. पराया दर्द
18. पैगाम
19. धर्म बहन
20.

अशोक कुमार शर्मा

अशोक कुमार शर्मा

1. छतीस करोङ का हार
2. मैं बेटा बंदूक का
3. फांसी मांगे बेटा बंदूक का
4. कानून वाला
5.

संपर्क-
अशोक कुमार शर्मा पुत्र श्री मदन लाल शर्मा
मु.पो.- रूपगढ
वाया- कौछोर
जिला- सीकर 
राजस्थान- 332406
राधा पॉकेट बुक्स- मेरठ

Sunday, July 30, 2017

उपन्यासकार

यह हिंदी के लोकप्रिय उपन्यासकारों की सूची है।
आपसे निवेदन है जो- जो नाम इसनें से रह गये हैं। आप इनके नाम नीचे कमेंट बाॅक्स में लिख दें, ताकी उनके विषय में जानकारी उपलब्ध  करवायी जा सके।

A. अनिल मोहन, आशीर्वाद पंडित, अनिल‌ सलूजा, अशोक कुमार शर्मा, अमिताभ
B. भारत
C. चंदर,
D. दिनेश ठाकुर, धीरज, डाॅ. रुनझुन सक्सेना,
E.
F. फखरे आलम खान
G. गुरुदत्त, गुलशन नंदा, गुप्तदूत
H.
I.- इब्ने सफी,
J.
K. - केशव पंडित, केशव पाण्डेय, कर्नल रंजीत, कुशवाहा कांत, कंवल शर्मा,‌ केवल पण्डित, कुमार कश्यप, कृष्ण चंदर
L
M. - मनोज, मौहन मौर्य, मीत गुप्ता,
N
O- ओमप्रकाश शर्मा, ओमप्रकाश शर्मा- जनप्रिय लेखक
P. प्रकाश भारती, प्रकाश पराशर, परशुराम शर्मा, परिवर्तन पण्डित
Q
R. - रानु, राजहंस, राहुल, रीमा भारती, राकेश पाठक, रमाकांत मिश्रा, राज भारती
S. शिवा पंडित, शगुन शर्मा, सुरेन्द्र मोहन पाठक, राज,  शैलेन्द्र तिवारी, संजय गुप्ता, SC बेदी, सूरज, समीर, सोफिया, सोनू पण्डित, सरला रानू, सुनील प्रभाकर, शुभानंद, सुनिल मोहन पाठक,
T. - टाइगर,
U.
V. वेदप्रकाश कंबोज, वेदप्रकाश शर्मा, वेदप्रकाश वर्मा, वर्षा(F), विनय प्रभाकर,
W.
X.
Y.
Z

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- गुरप्रीत सिंह-  9509583944

Saturday, July 29, 2017

शुभानंद

उत्तर प्रदेश के कई छोटे-बड़े शहरों में बचपन व्यतीत करने के बाद शुभानंद ने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से बी फार्मा किया और फ़िलहाल मुंबई में मौजूद हैं।
एस सी बेदी के लेखन ने इन्हें बचपन में इतना प्रभावित किया कि जब लेखन क्षेत्र में उतरे तो राजन-इकबाल को एक बार फिर मैदान में ले आये. उसके साथ इन्होने जावेद-अमर-जॉन नामक जासूसी श्रंखला की शुरुआत की जिस पर ये अब तक दो विस्तृत व एक लघु उपन्यास लिख चुके हैं.
       लेखन के क्षेत्र में उतरने पर इनकी मित्रता कई और लेखकों से हुई और इन्होने उनके साथ मिलकर एक नई प्रकाशन संस्था ‘सूरज पॉकेट बुक्स’ की स्थापना की.
इस संस्था में नए लेखकों के अलावा कुछ महान लेखक भी शामिल हुए जिनमे से एक खुद इनके गुरु ‘एस सी बेदी’ शामिल हैं. हाल ही मैं सूरज पॉकेट बुक्स को अंतर्राष्ट्रीय स्तर के लेखा ली चाइल्ड के उपन्यासों का हिंदी रूपान्तर करने के अधिकार हासिल हुए हैं.

शुभानंद के उपन्यास
1. कमीना
2. कब्र का रहस्य
3. जिस्म बदलने वाले
4.रोङ किलर
5. गोलियों की बरसात
6. जोकर जासूस
7. बदकिस्मत कातिल
8. राजन की शादी
9.
10.

रुनझुन सक्सेना

डॉक्टर रुनझुन सक्सेना शुभानंद

डॉक्टर रुनझुन सक्सेना शुभानंद का जन्म उत्तर प्रदेश के इलाहबाद शहर में हुआ था।
लेखन के मामले में स्कूली दिनों में उन्हें शंकर अंतर्राष्ट्रीय बाल प्रतियोगिता में लेखन के लिए सिल्वर मैडल प्राप्त हुआ।
पेशे से डेंटिस्ट हैं, ओरल मेडिसिन व रेडिओलोजी में एमडीएस डिग्री हासिल की है और फ़िलहाल टाटा कंसल्टेंसी में कार्यरत हैं।
लेखन में फिर से रूचि जागने के पर इन्होने ‘Ram, where are you?’ नामक लघु कथा लिखी. तदुपरांत इनकी कलम से निकला ‘The Secret of the Chalisa’ नामक उपन्यास जिसने इतनी प्रसिद्धी हासिल की कि प्रकाशक ने उसका हिंदी रूपान्तर भी बहुत जल्दी प्रकाशित कर दिया।

रुनझुन सक्सेना के उपन्यास
1. The Secret of the chalisa (English)
        हिंदी अनुवाद- चालीसा का रहस्य

प्रेषक- रमाकांत मिश्र

Friday, July 28, 2017

प्रतियोगिता-2017, विजेता, (तृतीय पोस्ट)

उपन्यास जीतो प्रतियोगिता- 2017 ( तृतीय पोस्ट)
इस प्रतियोगिता के विजेता क्रमशः निम्नलिखित हैं।

प्रथम-    विक्रम चौहान      - 9917636359
द्वितीय-  अशोक गिदवानी-   9414709195
तृतीय-    नीरज               - -9990159866

उक्त समस्त विजेताओं को साहित्य देश ब्लाॅग की तरफ से हार्दिक शुभकामनाएँ ।

विजेताओं जो पुरस्कार स्वरूप उपन्यास भिजवायी जा रही है‌।

प्रतियोगिता-2017, द्वितीय पोस्ट

उपन्यास जीतो प्रतियोगिता के सही उत्तर प्रतिभागी।   (द्वितीय पोस्ट)

प्रश्नोत्तर

1. अनिल मोहन के किस उपन्यास में जैसलमेर में स्थित मुगल बादशाह की लूट का वर्णन है?

उत्तर- सौ माइल्स, डाॅन जी।

2. किस लेखक के उपन्यासों पर 'इन्वेस्टिगेशन का जादूगर' लिखा होता है?

उत्तर- विनय प्रभाकर

3. सुरेन्द्र मोहन पाठक के किस उपन्यास में उनके प्रसिद्ध पात्र सुधीर के हमशक्ल का वर्णन है?

- आख़िरी मक़सद, The Last Goal

4. सस्पेंश का जादूगर या बादशाह किस लेखक को कहा जाता है?

- वेद प्रकाश शर्मा

5. कुशवाहा कांत का कौनसा उपन्यास क्रांति पर लिखा गया है?

उत्तर- लाल रेखा

6. हिंदी लोकप्रिय उपन्यास जगत में किस पात्र की सर्वाधिक नकल की गयी है?

उत्तर- केशव पण्डित

7. किस लेखक ने एस.सी. बेदी के लोकप्रिय पात्र राजन- इकबाल को लेकर उपन्यास लेखन आरम्भ किया?

उत्तर-  शुभानंद

8. वेदप्रकाश शर्मा का वह कौनसा उपन्यास था , जिसकी मनोज पॉकेट बुक्स ने घोषणा तो की थी, लेकिन वह उपन्यास कभी बाजार में नहीं आया?

उत्तर-  ताजमहल को तोङ दो।

9. हिंदी उपन्यास जगत में सर्वप्रथम पॉकेट बुक्स किस संस्था ने प्रकाशित की?

उत्तर-  हिंद पॉकेट बुक्स

10. कर्नल रंजीत का प्रथम उपन्यास कौनसा था?

उत्तर- हत्या का रहस्य।
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         प्रतियोगिता के प्रतिभागी

1. Rishit- 2july- 9472660515

2. OmPrakash Sahu- 7july-

3. Ashok Gidwani- 7july- 9414709195

4. Neeraj kargeti- 8july-9990159866

5. Anjali- 11july- 887300021

6. Abhishek Kumar- 15july- 7280828823

7. Shobhi Gupta- 18july- 7838110755

8. Vikram Chouhan- 20july- 9917636359

Saturday, July 1, 2017

प्रतियोगिता-2017- प्रथम पोस्ट

- उपन्यास जीतो प्रतियोगिता   (प्रथम पोस्ट)
निम्नलिखित दस प्रश्नों के उत्तर दो और जीतो उपन्यास।
प्रतियोगिता समय- 01.07.2017- 20.07.2017
- नियम अवश्य देखें।

1. अनिल मोहन के किस उपन्यास में जैसलमेर में स्थित मुगल बादशाह की लूट का वर्णन है?
2. किस लेखक के उपन्यासों पर 'इन्वेस्टिगेशन का जादूगर' लिखा होता है?
3. सुरेन्द्र मोहन पाठक के किस उपन्यास में उनके प्रसिद्ध पात्र सुधीर के हमशक्ल का वर्णन है?
4. सस्पेंश का जादूगर या बादशाह किस लेखक को कहा जाता है?
5. कुशवाहा कांत का कौनसा उपन्यास क्रांति पर लिखा गया है?
6. हिंदी लोकप्रिय उपन्यास जगत में किस पात्र की सर्वाधिक नकल की गयी है?
7. किस लेखक ने एस.सी. बेदी के लोकप्रिय पात्र राजन- इकबाल को लेकर उपन्यास लेखन आरम्भ किया?
8. वेदप्रकाश शर्मा का वह कौनसा उपन्यास था , जिसकी मनोज पॉकेट बुक्स ने घोषणा तो की थी, लेकिन वह उपन्यास कभी बाजार में नहीं आया?
9. हिंदी उपन्यास जगत में सर्वप्रथम पॉकेट बुक्स किस संस्था ने प्रकाशित की?
10. कर्नल रंजीत का प्रथम उपन्यास कौनसा था?
-
आपके पसंदीदा पांच लेखक कौन-कौन से है?
-
प्रतियोगिता के नियम
1. साहित्य देश ब्लाॅग का निर्यण अंतिम व मान्य होगा।
2. प्रतियोगिता का आधार पहले उत्तर दो पहले ईनाम पाओ।
3. प्रतिभागी को इस पोस्ट के नीचे कमेंट बाॅक्स में एक कमेंट अवश्य करना होगा।
"मैं ....(अपना नाम, संपर्क नंबर) इस प्रतियोगिता में भाग ले रहा हूँ।" (अनिवार्य है)
यह नियम प्रतियोगिता की पारदर्शिता के लिए है।
4. समस्त प्रश्नों के उत्तर देने वाले विजेता को पुरस्कृत किया जायेगा।
5. अतिरिक्त प्रश्न अपने पसंदीदा पांच उपन्यासकारों के नाम यथासंभव लिखें। (अनिवार्य नहीं)
6. अगर प्रतियोगिता सभी प्रश्नों के उत्तर नहीं दे पाता तो सबसे ज्यादा सही प्रश्नों के उत्तर प्रदाता को विजेता माना जायेगा।
7. आपको प्रतियोगिता से संबंधित अन्य अपडेट समय- समय पर मिलती रहे इसके लिए ब्लाॅग की सदस्य ग्रहण करें।
8. प्रतियोगिता का निर्णय 31.07.2017 को दिया जायेगा।
9.  प्रथम विजेता- हीरा फेरी- सुरेन्द्र मोहन पाठक
     द्वितीय विजेता- द ओल्ड फोर्ट/ द ट्रेजडी गर्ल- एम. इकराम फरीदी।
     तृतीय विजेता- एक लाश का चक्कर- अनुराग कुमार जीनियस

10. समस्त प्रश्नों के उत्तर email करें।

- sahityadesh@gmail.com
10. अन्य जानकारी के लिए संपर्क करें।
गुरप्रीत सिंह-
9509583944
9252829634

Sunday, June 11, 2017

चन्द्रहास

चन्द्रहास नामक लेखक के विषय में जितनी जानकारी उपलब्ध है उनके अनुसार इनका स्वयं की चन्द्रहास नामक प्रकाशन संस्था थी, ये बिहार के निवासी थे।
इनकी सबसे बङी विशेषता ये थी की इनके उपन्यास पर इनके हस्ताक्षर होते थे। ऐसा प्रयोग इन्होंने इनके नाम से नकली उपन्यासों से बचने के लिए किया था।
इनके उपन्यासों की संख्या तो मालूम नहीं लेकिन इन्होंने बीस से ज्यादा उपन्यास तो लिखे ही होंगे। इनके उपन्यास प्रेम तपस्या पर लिखा है बीसवा उपन्यास
चन्द्रहास के उपन्यास
1. अपराधी
2. प्रेम तपस्या ( यह इनका बीसवा उपन्यास था)
3.
5.
5.
- चन्द्रहास
चन्द्रहास पॉकेट बुक्स
कुआरी बरई टोला
हाजीपुर, वैशाली, बिहार

Saturday, June 10, 2017

सावन

लेखक सावन के विषय में कोई विशेष जानकारी उपलब्ध नहीं होती। उनके एक उपन्यास का एक चित्र उपलब्ध है, यह उपन्यास एक मित्र के पास सुरक्षित है।

इनका लक्ष्मण रेखा उपन्यास विजय पॉकेट बुक्स से प्रकाशित हुआ था।

लेखक सावन के उपन्यास
1. लक्ष्मण रेखा



उक्त लेखक के विषय में अगर किसी भी पाठक मित्र के पास कोई भी जानकारी हो तो हमें भेजने का कष्ट करें।

- गुरप्रीत सिंह

     - 9509583944

Email- sahityadesh@gmail.com


Friday, June 9, 2017

विनय प्रभाकर

विनय प्रभाकर के उपन्यासों पर थ्रिल, सस्पेंश और इंवेस्टीगेशन का जादूगर शब्द लिखा होता है।
  अपनी उपन्यास में ये स्वयं एक वकील के रूप में उपस्थित होते हैं।
   इनके यहाँ प्रारंभिक उपन्यास सामाजिक थे फिर बाद के साॅशियल थ्रिलर थे। बाद में इन्होंने अपना लेखन बदल कर एक नये पात्र 'नाना पाटेकर' को लेकर आये। नाना पाटेकर सीरिज ने  इनके लेखन को एक नया आयाम दिया।
 
विनय प्रभाकर के उपन्यास
1. सुहागिन का हत्यारा
2. औरत मेरी मुट्ठी में।
3. पैसा ही भगवान
4. कोठी नंबर 10
5. कातिल इक्के
6. कानून का दुश्मन
7. विधवा का इंतकाम
8. हत्यारी बहू
9. राखी मांगे खून
10. कानून का बाप
11. सुहाग का सौदा
12. अंधी अदालत
13. मासूम बेटा
14. पाप की दौलत
15. इंसाफ का फरिश्ता
16. खुदा का बेटा
17. चार बीवियों का पति
18. एक दिन की सुहागिन
19. इंसाफ का खून
20. कानून का खिलाङी
21. सुहागिन का इंसाफ
22. मासूम हत्यारा
23. जुर्म का शहंशाह
24. नर्क का भगवान
25. बेटी और बारूद
26. कोख का लहू
27. एक नंबर का शैतान
28. दस करोङ की हत्या
29. दस दिन की मौत
30. काला वारंट
31. जुर्म की रोटी
32. कफन तेरे सुहाग का
33. दौलत का कफन
34. जुर्म की मेहंदी
35. राखी का हत्यारा
36. 31 जनवरी की रात
37. मरने नहीं दूंगी
38. कातिल कौन
39. बारूद का बेटा
40. मैं जिंदा हूँ
41. क्राइम शाॅप
42. बिंदिया और मौत
43. कानून का रखवाला
नाना पाटेकर सीरीज
44. मौत आयेगी सात तालों में
45. सूअर का बाल
46.
47.
48.
49.
50.

Thursday, June 8, 2017

आबिद रिजवी

मैं राही की तरह चलता रहा, पीछे का निशान मिटता रहा।
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मेरठ निवासी आबिद रिजवी जी लोकप्रिय उपन्यास जगत के एक ऐसे शख्स हैं जिनके पास उपन्यास जगत की यादों का विशाल खजाना है। अगर आप एक बात पूछोगे तो वे उससे संबंधित कई आख्यान आपको सुनाते चलेंगे।
रिजवी साहब के पास जितना यादों का विशाल खजाना है उतने ही वे सहृदय और सरल व्यक्तित्व के स्वामी भी हैं।
  मेरी उनसे कुछ दिन पूर्व उपन्यास साहित्य को लेकर चर्चा हुयी, हालांकि यह चर्चा मुख्य तौर पर उनके जीवन से संबंधित ही थी।
  आबिद रिजवी जी की छात्रावस्था में ही लेखन की ओर रूचि थी और वे कक्षा 12 के दौरान ही विभिन्‍न पत्र- पत्रिकाओं के लिए अपने आलेख व कहानियाँ भेजने लग गये थे। उसके बाद लेखन का चला यह दौर आज तक यथावत जारी है।
मूल रूप से इलाहाबाद के निवासी आबिद रिजवी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा इलाहाबाद से ही पूर्ण की और वहीं से ही अपनी लेखन यात्रा की शुरुआत की।
उन्होंने बताया की तब के प्रसिद्ध सामाजिक उपन्यासकार प्यारे लाल आवारा से मेरा संपर्क हुआ। प्यारे लाल आवारा तब अधेङावस्था की ओर थे और मैं युवा अवस्था की ओर। मैं सुबह आठ बजे ही उनकी सेवा में हाजिर हो जाता और उन्होंने ही मुझे लेखन की विभिन्‍न बारीकियों से परिचित करवाया।
    मैं तब विद्यार्थी ही था और मेरी आर्थिक स्थिति को देखते हुए प्यारे लाल आवारा ने मुझे तात्कालिक प्रसिद्ध पत्रिका ' जासूसी दुनिया' के कार्यालय भेज दिया। जहाँ मेरा संपर्क उर्दू के प्रसिद्ध लेखक इब्ने सफी और इब्ने सईद से हुआ। ये दोनों प्यारे लाल जी के मित्र थे।
    रिजवी साहब की प्रतिभा को देखते हुए इन्होंने प्यारे लाल आवारा जी को कहा था ये लङका तो " .... ना ए तराश है।" अर्थात यह तो एक ऐसा हीरा है जिसे तराशा नहीं गया।
  और इस हीरे ने इस कथन को सत्य भी साबित कर दिया। आप स्वयं देखिए जो शख्स इब्ने सफी से लेकर सुरेन्द्र मोहन पाठक, वेदप्रकाश शर्मा से होते हुए कंवल शर्मा, सबा खान और नये लेखक अनुराग कुमार जीनियस के समय में भी उतनी ही ऊर्जा से कार्यरत है। वहीं रिजवी साहब के जमाने के असंख्य लेखक आज गुमनामी के अंधेर में खो गये। खैर.......
सन् 1963-64 के समय में रिजवी जी को जासूसी दुनिया के कार्यालय से 60 रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता था।
  स्नातक स्तरीय शिक्षा इन्होंने गोरखपुर के .....काॅलेज से पूर्ण की जहां इनका परिचय हिंदी के विद्वान डाॅ. रामकुमार वर्मा पद्मविभूष, जगदीश गुप्त और डाॅ. रघुवंश से हुआ। रिजवी साहब अपने समय के युनिवर्सिटी में एक मात्र मुस्लिम युवक थे जो हिंदी के छात्र थे।
इस विषय पर उन्होंने बङी ही शांति से कहा, -" मुझे आत्मसंतोष है की मुझे साहित्य जगत का सानिध्य मिला।"
यही सानिध्य आबिद रिजवी को बहुप्रतिभा वाला लेखक बनाता है।
इन्होंने युवावस्था में ही चार उपन्यास लिखे।
अजजाही-अनजानी राह, धुंधला चेहरा-धुंधला रूप, अतीत की परछाईयां, सरिता।
- "आप के ये उपन्यास आज कहां से उपलब्ध हो सकते हैं।"- मैंने पूछा।
रिजवी जी ने उत्तर दिया,-" मैं राही की तरह चलता रहा, पीछे का निशान मिटता रहा। अब आप इसे शौक, स्वभाव या अक्ल मानिए मैंने कभी अपना लिखा संग्रह करने का उस वक्त सोचा तक भी नहीं। यही मेरी जिंदगी का पहलू है। खैर.....।"

    उस दौर के लेखक इतने डिग्रधारी नहीं थे लेकिन रिजवी साहब ने उच्चस्तरीय डिग्री भी ली और स्कूल- काॅलेज में पढाया भी, लेकिन साथ-साथ अपने लेखक को जिंदा रखा।
      बुंदेलखंड के एक इंटर काॅलेज में 120₹ माहवार पर पढाने लगे और वहाँ के अध्यापकों  की प्रेरणा से इन्होंने B.Ed.भी किया। हजारी लाल इंटर काॅलेज ...... से B.ed के पश्चात वहीं पर नौकरी भी लग गयी लेकिन इनके अंदर का लेखक ज्यादा दिन तक एक बंद जिंदगी जैसी नौकरी से खुश न था। काॅलेज के अत्यधिक आग्रह के पश्चात ये ग्रीष्मकालीन छुट्टियों के दौरान काॅलेज से त्यागपत्र दे आये।

सन् 1967 में शादी हो गयी। इन्होंने अपने समय की प्रसिद्ध पत्रिका 'पेरेमेशन और खान वाले सीरीज' के लिए लिखना आरम्भ कर दिया।
"जिंदगी गुजरती रही और मैं लिखता रहा। आज से लगभग 45 वर्ष पूर्व इलाहाबाद से मेरठ आ गया। उस समय मेरठ में तीस से उपर प्रकाशन थे और ये मेरा सौभाग्य है की मैंने लगभग प्रकाशन के लिए लिखा। शायद ही ऐसा कोई विषय हो जिस पर मैंने नहीं लिखा।"
    तभी मेरे दिमाग में एक शब्दकोश ने छलांग लगायी। मैं जब स्नातक कर रहा था तब बाल कहानियाँ लिखा करता था। उस समय मेरे पास एक छोटा सा पाॅकेट शब्दकोश था, जिस पर आबिद रिजवी M.A. लिखा हुआ है।
ये जिक्र जब मैंने रिजवी साहब से किया तो उन्होंने हँसते हुए कहा- "मैंने इतना लिखा है की मेरा वजन किताबों के सामने कम हो जायेगा।"
यह सच भी है रिजवी साहब ने आलेख, कहानियाँ, जीवनी, उपन्यास, अनुवाद , Ghost writing, कम्प्यूटर बुक्स, टेक्निकल, शब्दकोश जैसे विभिन्न विषयों पर लिखा और खूब लिखा है।
"मैंने विविध विषयों पर इतना लिखा है की वो कभी खत्म नहीं होगा। नौकरी करता तो शायद इतना कभी नहीं लिख पाता।"
आप जनरल बुक्स की दुकान पर चले जायें आपको कोई न कोई ऐसी किताब मिल जायेगी जिस पर आबिद रिजवी का नाम होगा। लेखक, अनुवाद, संपादक या फिर संकलनकर्ता के रूप में इनकी असंख्य किताबें हैं।
और आज भी उतने ही जोश के साथ लेखक में सक्रिय हैं। रवि पॉकेट बुक्स, रजत पॉकेट बुक्स हो या अन्य कोई संस्था । रिजवी साहब उनके लिये निरंतर लेखन‌ में लगे हुए हैं।
       पुराने उपन्यास के संदर्भ में बात चलने पर दुख व्यक्त करते हुए कहा की आज के लोग पुराने लेखकों को भूल गये हैं‌। अपने समय में जिनका नाम बिकता था आज उनका कोई नाम लेवा नहीं है।
यह दुख अपनी जगह सही भी है। एक तरफ हम बङे पाठक होने का स्वांग करते हैं वहीं दूसरी तरफ उन लेखकों की सुध तक लेने का ख्याल तक जहन में नह लाते जिनकी रचनाओं ने हमें बहुत कुछ सिखाया है।
   आबिद रिजवी साहब आज भी लेखन में सक्रिय हैं। आज के युवा लेखकों ने लिए एक प्रेरणा है और नव लेखकों को उत्साहित करने वाले  हैं। बहुत से नये लेखक आबिद रिजवी जी की प्रेरणा से लेखन क्षेत्र में सक्रिय भी हैं।
  "मैंने जो अर्जित किया है, वह मेरा ज्ञान है।"