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Sunday, June 11, 2017

चन्द्रहास

चन्द्रहास नामक लेखक के विषय में जितनी जानकारी उपलब्ध है उनके अनुसार इनका स्वयं की चन्द्रहास नामक प्रकाशन संस्था थी, ये बिहार के निवासी थे।
इनकी सबसे बङी विशेषता ये थी की इनके उपन्यास पर इनके हस्ताक्षर होते थे। ऐसा प्रयोग इन्होंने इनके नाम से नकली उपन्यासों से बचने के लिए किया था।
इनके उपन्यासों की संख्या तो मालूम नहीं लेकिन इन्होंने बीस से ज्यादा उपन्यास तो लिखे ही होंगे। इनके उपन्यास प्रेम तपस्या पर लिखा है बीसवा उपन्यास
चन्द्रहास के उपन्यास
1. अपराधी
2. प्रेम तपस्या ( यह इनका बीसवा उपन्यास था)
3.
5.
5.
- चन्द्रहास
चन्द्रहास पॉकेट बुक्स
कुआरी बरई टोला
हाजीपुर, वैशाली, बिहार

Saturday, June 10, 2017

सावन

लेखक सावन के विषय में कोई विशेष जानकारी उपलब्ध नहीं होती। उनके एक उपन्यास का एक चित्र उपलब्ध है, यह उपन्यास एक मित्र के पास सुरक्षित है।

इनका लक्ष्मण रेखा उपन्यास विजय पॉकेट बुक्स से प्रकाशित हुआ था।

लेखक सावन के उपन्यास
1. लक्ष्मण रेखा



उक्त लेखक के विषय में अगर किसी भी पाठक मित्र के पास कोई भी जानकारी हो तो हमें भेजने का कष्ट करें।

- गुरप्रीत सिंह

     - 9509583944

Email- sahityadesh@gmail.com


Friday, June 9, 2017

विनय प्रभाकर

विनय प्रभाकर के उपन्यासों पर थ्रिल, सस्पेंश और इंवेस्टीगेशन का जादूगर शब्द लिखा होता है।
  अपनी उपन्यास में ये स्वयं एक वकील के रूप में उपस्थित होते हैं।
   इनके यहाँ प्रारंभिक उपन्यास सामाजिक थे फिर बाद के साॅशियल थ्रिलर थे। बाद में इन्होंने अपना लेखन बदल कर एक नये पात्र 'नाना पाटेकर' को लेकर आये। नाना पाटेकर सीरिज ने  इनके लेखन को एक नया आयाम दिया।
 
विनय प्रभाकर के उपन्यास
1. सुहागिन का हत्यारा
2. औरत मेरी मुट्ठी में।
3. पैसा ही भगवान
4. कोठी नंबर 10
5. कातिल इक्के
6. कानून का दुश्मन
7. विधवा का इंतकाम
8. हत्यारी बहू
9. राखी मांगे खून
10. कानून का बाप
11. सुहाग का सौदा
12. अंधी अदालत
13. मासूम बेटा
14. पाप की दौलत
15. इंसाफ का फरिश्ता
16. खुदा का बेटा
17. चार बीवियों का पति
18. एक दिन की सुहागिन
19. इंसाफ का खून
20. कानून का खिलाङी
21. सुहागिन का इंसाफ
22. मासूम हत्यारा
23. जुर्म का शहंशाह
24. नर्क का भगवान
25. बेटी और बारूद
26. कोख का लहू
27. एक नंबर का शैतान
28. दस करोङ की हत्या
29. दस दिन की मौत
30. काला वारंट
31. जुर्म की रोटी
32. कफन तेरे सुहाग का
33. दौलत का कफन
34. जुर्म की मेहंदी
35. राखी का हत्यारा
36. 31 जनवरी की रात
37. मरने नहीं दूंगी
38. कातिल कौन
39. बारूद का बेटा
40. मैं जिंदा हूँ
41. क्राइम शाॅप
42. बिंदिया और मौत
43. कानून का रखवाला
नाना पाटेकर सीरीज
44. मौत आयेगी सात तालों में
45. सूअर का बाल
46.
47.
48.
49.
50.

Thursday, June 8, 2017

आबिद रिजवी

मैं राही की तरह चलता रहा, पीछे का निशान मिटता रहा।
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मेरठ निवासी आबिद रिजवी जी लोकप्रिय उपन्यास जगत के एक ऐसे शख्स हैं जिनके पास उपन्यास जगत की यादों का विशाल खजाना है। अगर आप एक बात पूछोगे तो वे उससे संबंधित कई आख्यान आपको सुनाते चलेंगे।
रिजवी साहब के पास जितना यादों का विशाल खजाना है उतने ही वे सहृदय और सरल व्यक्तित्व के स्वामी भी हैं।
  मेरी उनसे कुछ दिन पूर्व उपन्यास साहित्य को लेकर चर्चा हुयी, हालांकि यह चर्चा मुख्य तौर पर उनके जीवन से संबंधित ही थी।
  आबिद रिजवी जी की छात्रावस्था में ही लेखन की ओर रूचि थी और वे कक्षा 12 के दौरान ही विभिन्‍न पत्र- पत्रिकाओं के लिए अपने आलेख व कहानियाँ भेजने लग गये थे। उसके बाद लेखन का चला यह दौर आज तक यथावत जारी है।
मूल रूप से इलाहाबाद के निवासी आबिद रिजवी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा इलाहाबाद से ही पूर्ण की और वहीं से ही अपनी लेखन यात्रा की शुरुआत की।
उन्होंने बताया की तब के प्रसिद्ध सामाजिक उपन्यासकार प्यारे लाल आवारा से मेरा संपर्क हुआ। प्यारे लाल आवारा तब अधेङावस्था की ओर थे और मैं युवा अवस्था की ओर। मैं सुबह आठ बजे ही उनकी सेवा में हाजिर हो जाता और उन्होंने ही मुझे लेखन की विभिन्‍न बारीकियों से परिचित करवाया।
    मैं तब विद्यार्थी ही था और मेरी आर्थिक स्थिति को देखते हुए प्यारे लाल आवारा ने मुझे तात्कालिक प्रसिद्ध पत्रिका ' जासूसी दुनिया' के कार्यालय भेज दिया। जहाँ मेरा संपर्क उर्दू के प्रसिद्ध लेखक इब्ने सफी और इब्ने सईद से हुआ। ये दोनों प्यारे लाल जी के मित्र थे।
    रिजवी साहब की प्रतिभा को देखते हुए इन्होंने प्यारे लाल आवारा जी को कहा था ये लङका तो " .... ना ए तराश है।" अर्थात यह तो एक ऐसा हीरा है जिसे तराशा नहीं गया।
  और इस हीरे ने इस कथन को सत्य भी साबित कर दिया। आप स्वयं देखिए जो शख्स इब्ने सफी से लेकर सुरेन्द्र मोहन पाठक, वेदप्रकाश शर्मा से होते हुए कंवल शर्मा, सबा खान और नये लेखक अनुराग कुमार जीनियस के समय में भी उतनी ही ऊर्जा से कार्यरत है। वहीं रिजवी साहब के जमाने के असंख्य लेखक आज गुमनामी के अंधेर में खो गये। खैर.......
सन् 1963-64 के समय में रिजवी जी को जासूसी दुनिया के कार्यालय से 60 रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता था।
  स्नातक स्तरीय शिक्षा इन्होंने गोरखपुर के .....काॅलेज से पूर्ण की जहां इनका परिचय हिंदी के विद्वान डाॅ. रामकुमार वर्मा पद्मविभूष, जगदीश गुप्त और डाॅ. रघुवंश से हुआ। रिजवी साहब अपने समय के युनिवर्सिटी में एक मात्र मुस्लिम युवक थे जो हिंदी के छात्र थे।
इस विषय पर उन्होंने बङी ही शांति से कहा, -" मुझे आत्मसंतोष है की मुझे साहित्य जगत का सानिध्य मिला।"
यही सानिध्य आबिद रिजवी को बहुप्रतिभा वाला लेखक बनाता है।
इन्होंने युवावस्था में ही चार उपन्यास लिखे।
अजजाही-अनजानी राह, धुंधला चेहरा-धुंधला रूप, अतीत की परछाईयां, सरिता।
- "आप के ये उपन्यास आज कहां से उपलब्ध हो सकते हैं।"- मैंने पूछा।
रिजवी जी ने उत्तर दिया,-" मैं राही की तरह चलता रहा, पीछे का निशान मिटता रहा। अब आप इसे शौक, स्वभाव या अक्ल मानिए मैंने कभी अपना लिखा संग्रह करने का उस वक्त सोचा तक भी नहीं। यही मेरी जिंदगी का पहलू है। खैर.....।"

    उस दौर के लेखक इतने डिग्रधारी नहीं थे लेकिन रिजवी साहब ने उच्चस्तरीय डिग्री भी ली और स्कूल- काॅलेज में पढाया भी, लेकिन साथ-साथ अपने लेखक को जिंदा रखा।
      बुंदेलखंड के एक इंटर काॅलेज में 120₹ माहवार पर पढाने लगे और वहाँ के अध्यापकों  की प्रेरणा से इन्होंने B.Ed.भी किया। हजारी लाल इंटर काॅलेज ...... से B.ed के पश्चात वहीं पर नौकरी भी लग गयी लेकिन इनके अंदर का लेखक ज्यादा दिन तक एक बंद जिंदगी जैसी नौकरी से खुश न था। काॅलेज के अत्यधिक आग्रह के पश्चात ये ग्रीष्मकालीन छुट्टियों के दौरान काॅलेज से त्यागपत्र दे आये।

सन् 1967 में शादी हो गयी। इन्होंने अपने समय की प्रसिद्ध पत्रिका 'पेरेमेशन और खान वाले सीरीज' के लिए लिखना आरम्भ कर दिया।
"जिंदगी गुजरती रही और मैं लिखता रहा। आज से लगभग 45 वर्ष पूर्व इलाहाबाद से मेरठ आ गया। उस समय मेरठ में तीस से उपर प्रकाशन थे और ये मेरा सौभाग्य है की मैंने लगभग प्रकाशन के लिए लिखा। शायद ही ऐसा कोई विषय हो जिस पर मैंने नहीं लिखा।"
    तभी मेरे दिमाग में एक शब्दकोश ने छलांग लगायी। मैं जब स्नातक कर रहा था तब बाल कहानियाँ लिखा करता था। उस समय मेरे पास एक छोटा सा पाॅकेट शब्दकोश था, जिस पर आबिद रिजवी M.A. लिखा हुआ है।
ये जिक्र जब मैंने रिजवी साहब से किया तो उन्होंने हँसते हुए कहा- "मैंने इतना लिखा है की मेरा वजन किताबों के सामने कम हो जायेगा।"
यह सच भी है रिजवी साहब ने आलेख, कहानियाँ, जीवनी, उपन्यास, अनुवाद , Ghost writing, कम्प्यूटर बुक्स, टेक्निकल, शब्दकोश जैसे विभिन्न विषयों पर लिखा और खूब लिखा है।
"मैंने विविध विषयों पर इतना लिखा है की वो कभी खत्म नहीं होगा। नौकरी करता तो शायद इतना कभी नहीं लिख पाता।"
आप जनरल बुक्स की दुकान पर चले जायें आपको कोई न कोई ऐसी किताब मिल जायेगी जिस पर आबिद रिजवी का नाम होगा। लेखक, अनुवाद, संपादक या फिर संकलनकर्ता के रूप में इनकी असंख्य किताबें हैं।
और आज भी उतने ही जोश के साथ लेखक में सक्रिय हैं। रवि पॉकेट बुक्स, रजत पॉकेट बुक्स हो या अन्य कोई संस्था । रिजवी साहब उनके लिये निरंतर लेखन‌ में लगे हुए हैं।
       पुराने उपन्यास के संदर्भ में बात चलने पर दुख व्यक्त करते हुए कहा की आज के लोग पुराने लेखकों को भूल गये हैं‌। अपने समय में जिनका नाम बिकता था आज उनका कोई नाम लेवा नहीं है।
यह दुख अपनी जगह सही भी है। एक तरफ हम बङे पाठक होने का स्वांग करते हैं वहीं दूसरी तरफ उन लेखकों की सुध तक लेने का ख्याल तक जहन में नह लाते जिनकी रचनाओं ने हमें बहुत कुछ सिखाया है।
   आबिद रिजवी साहब आज भी लेखन में सक्रिय हैं। आज के युवा लेखकों ने लिए एक प्रेरणा है और नव लेखकों को उत्साहित करने वाले  हैं। बहुत से नये लेखक आबिद रिजवी जी की प्रेरणा से लेखन क्षेत्र में सक्रिय भी हैं।
  "मैंने जो अर्जित किया है, वह मेरा ज्ञान है।"

अपनी बात- संपादक टीम

नमस्कार,
      जब इस ब्लाॅग को आरम्भ किया गया था, तब मुझे तो कम से कम ऐसी उम्मीद नहीं थी की इस उपन्यास जगत के अपने समय के लोकप्रिय उपन्यासकारों‌ के उपन्यास आज मिलने दुर्लभ हो जायेंगे।
    लेकिन फिर भी इस ब्लाॅग के माध्यम से एक कोशिश है उपन्यास जगत के उन लेखकों की यथासंभव जानकारी को एकत्र किया जा सके, ताकि भविष्य के पाठक इस अमूल्य धरोहर से लाभांवित हो सकें।
   इस ग्रुप ने अब तक पचास लेखकों का परिचय प्रस्तुत किया है, हालांकि ये परिचय/जानकारी अधूरी है लेकिन जैसे-जैसे जानकारी उपलब्ध होती जायेगी वैसे-वैसे  अधूरेपन को पूर्ण कर दिया जायेगा।
      एक बङी समस्या ये भी है की उपन्यास जगत के बहुत से लेखक आज गुमनामी के अंधेरे में खो गये उनके विषय में जानकारी एकत्र करना वास्तव में बहुत मुश्किल है। दूसरा बहुत से छद्म लेखक (Ghost Writer) भी हैं। इस प्रकार उपन्यासकारों की जानकारी को ढूंढना कठिन होता जा रहा है।
   फिर भी यथासंभव प्रयास जारी हैं। भविष्य में इस ब्लाॅग के माध्यम से पाठकों को अपने प्रिय लेखकों के विषय में कुछ न कुछ तो पढने को मिलेगा।
हम उन समस्त मित्रों का भी हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं जिन्होंने इन लेखकों के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करवायी ।
- अगर आपके पास किसी भी लेखक की कोई भी जानकारी हो (उपन्यास लिस्ट, चित्र, पता) तो हमें भेजने का कष्ट करें।
धन्यवाद
- गुरप्रीत सिंह
राजस्थान-335051
Mob/what's app- 9509583944
Email- sahityadesh@gmail.com