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Sunday, May 13, 2018

वेदप्रकाश कंबोज- परिचर्चा

वेद प्रकाश कांबोज की रहस्य रोमांच से भरी दुनिया :               
जासूसी नावलों का अद्भुत संसार (भाग-1)      
दिनाक -09.5.18
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वेद प्रकाश काम्बोज जी का नाम रोमांचक जासूसी उपन्यासों की दुनिया मे परिचय का मुहताज नहीं है एक समय था कि मार्केट मे इब्ने सफ़ी सूरज की तरह से प्रतिष्ठित लेखक थे।
            उनके उपन्यास 1950 से 60 के दशक मे इतने पापुलर थे कि हर छोटा या बड़ा दुकानदार, बस का या रेल का यात्री,  काम वाली ग्रहणी इनके हाथ मे, जासूसी दुनिया नॉवेल, धर्मयुग, या मनोहर कहानियाँ, जैसी कोई ना कोई पत्रिका को देखा जा सकता था । गर्मी की दोपहर हो या रात,  मकान की छत पर भोजन के बाद जलते लालटेन या पेट्रोमेक्स के उजाले मे बजते रेडियो के साथ लोग इन्हीं मेगज़ीन या नोवेल्स मे समय गुजारते देखे जाते थे।
               तभी अचानक जैसे सूरज पर बदली छा जाए,  सफ़ी साहब काफी ज्यादा बीमार हो गए, और उसके बाद वो लगभग दो साल बाद मार्केट मे वापस अपनी उपस्थिती दर्ज करवा पाये, तब तक उनके किरदारों पर लिखने वाले नए लेखकों का पदार्पण मार्केट मे होना शुरू हो चुका था, विनोद हमीद का एडिक्शन इतना जबर्दस्त था कि पाठक उन नए लेखकों को भी पढ़ने लगे।
            सन् 1958  से 16-17 वर्ष की अल्प आयु मे काम्बोज साहब ने अपने शुरुआती लेखन मे सेल्फ नरेटिंग स्टाइल मे कुछ उपन्यास लिखे, फिर इनहोने जो विजय रघुनाथ सीरीज लिखी, तो क्या आदमी क्या औरतें सभी इनकी कलम के दीवाने बन गए, धीरे धीरे कुछ 4  नोवेल्स के बाद शोहरत ने इनका दामन मजबूती से जो थामा है तो फिर उन्हें मुड़ कर ....पीछे देखने की जरूरत नहीं पड़ी, हिंदुस्तान के पाठकों मे सफ़ी साहब के पापुलर किरदार थे कर्नल विनोद और कैप्टेन हमीद ,मगर पड़ोसी देश और उर्दू के पढ़ने वालों मे ज्यादा मशहूर हुआ चरित्र इमरान था, यहाँ भारत मे भी उसे राजेश के रूप मे पसंद किया गया मगर डिमांड विनोद -हमीद की ज्यादा थी और इन पात्रों ने उर्दू लेखक एन. सफ़ी और एच॰ इकबाल और जनाब आबिद रिजवी साहब को भी काफी जगह दिलवा दी और भी कई नये लेखक आए ऊनका
      जिक्र मैं एक अलग ब्लॉग मे करूंगा। उन दिनों देश के प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी भी, सफ़ी साहब के जबर्दस्त फ़ैन थे उन्होने भी डेढ़ मतवाले (हिन्दी नाम हम्बग दी ग्रेट )जो इब्ने सफ़ी जी ने Schizophrenia नामक बीमारी से ठीक होने के बाद लिखा था को मँगवा कर पढ़ा था।  कहते हैं कि, रिलीज वाले दिन लोगों ने कतार मे लग कर नॉवेल लिया था जिसकी shortage हो जाने से वो दोबारा प्रकाशित हुआ था।
            हिन्दी जासूसी दुनिया मे अनुवादक प्रेम प्रकाश ने सफ़ी साहब के किरदारों के नए नाम रख दिये थे , इमरान हो गए राजेश।   राजेश से प्रेरित हो कर काम्बोज जी ने अपने चरित्र का नाम रखा था, विजय । लेकिन दोनों मे काफी अंतर था जो कालांतर मे बढ़ता ही चला गया, पुलिस का कप्तान फ़ैयाज़ जो हिन्दी जासूसी दुनिया मे कैप्टेन मलखान कहलाया, वो काम्बोज साहब के उपन्यासों मे सुपर रघुनाथ हो गया, पढ़ने वाले बाखूबी जानते हैं कि मानस पुत्र पर पूरी छाप उसके रचयिता की होती है, ये भी फ़ैयाज़ या मलखान से काफी जुदा चरित्र स्थापित हुआ, सीक्रेट सर्विस के चीफ विजय जो अपनी हकीकत छुपाये रखते थे और खुद को मूर्ख पोज करके दूसरों को मूर्ख बना कर अपना मकसद हल कर लेते थे, इस तरह का चरित्र कई लेखकों ने अड़ोप्ट किया मगर मकबूलियत कांबोज साहब को ही मिली, उन्होने इस चरित्र को कमाल का तराशा। 
         कांबोज साहब ने  विजय के सहायक का नाम ब्लैक ब्वाय रखा था जो बाकी सब सदस्यों के सामने काला नकाब डाल कर आता था और सीक्रेट सर्विस के चीफ का रोल प्ले करता था, वैसे ही जैसे उर्दू जासूसी दुनिया मे सफ़ी साहब का स्मार्ट मगर खुद को बेवकूफ दिखा कर बड़ी अय्यारी से काम करने वाला इमरान हकीकत मे सीक्रेट सर्विस का नकाबपोश चीफ एक्स टू होता था जिसे अनुवादक प्रेम प्रकाश द्वारा पवन का नाम दे दिया गया था राजेश की गैर मौजूदगी मे पवन का रोल उसका कभी भी सामने ना आने वाला सहायक फाइव टू करता था।

..... सिलसिला जारी रहेगा कड़ी 2-  मे कृपया इंतेजार कीजिये और अपनी जानकारी कमेंट्स के जरिये शेयर करिए ।। बा कलम

लेखक-  Balwinder Singh

विश्व मोहन विराग

विश्व मोहन विराग झारखण्ड के निवासी हैं और साहित्य क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में विराग साहब फिल्म‌ निर्माण और लेखन में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।
   उपन्यास क्षेत्र में ज्यादा समय सक्रिय नहीं रहे। प्राप्त जानकारी के अनुसार इनके उपन्यास रजत पॉकेट बुक्स- मेरठ से प्रकाशित हुये थे।

विश्व मोहन विराग के उपन्यास
1. मरघट
2. सौ करोङ डाॅलर के हीरे
3. आये नहीं सजना(अप्रकाशित)

संपर्क
विश्व मोहन विराग
(लेखक, निर्देशक,गीतकार)
विद्यापुरी,
झुमरीतिलैया(कोडरमा)
झारखण्ड

Friday, May 4, 2018

रितुराज

रितुराज के उपन्यास1. नसीब औरत का 

2. बीवी बच्चे

3. घर की लक्ष्मी

4. सिंदूर

5. पत्थर की देवी

6. आंचल में है दूध

7. बिंदिया

8. प्रेमदीप

9. राखी

10. पूजा करुंगी मैं

11. नसीब 

12. देवी माँ

13. परिवार

14. बहूरानी

15. कफन

16. काला सिंदूर

17. वो आ गयी

18. रानी बेटी

19. औरत 

20. खानदान

21. सुहाग

22. विधवा

23. काजल

24. किराये की माँ

25. जीवन दान

26. चिराग

27. परमवीर चक्र

28. गुङिया

29. बारात

30.  उधार का बेटा

31. चांद सूरज

उपर्युक्त सभी उपन्यास तुलसी पॉकेट बुक्स- मेरठ


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अजय सिंह

नाम- अजय कुमार

माता- दुर्गा देवी

पिता नाम- बिरेन्द्र सिंह( birendra Singh

शिक्षा- MSC in applied mathematics 

जन्म दिनांक- 29.07.1982

संपर्क नंबर- 98551916207

इमेल- 27@gmail.com (o alphabet)

प्रथम उपन्यास/किताब-  कौओं का हमला

कुल किताबों की‌ लिस्ट-

वर्तमान कार्यक्षेत्र- टीवी क्षेत्र में धारावाहिक लेखन।

- CID, आहट, क्राइम पेट्रोल, अगले जन्म मोहे बिटिया हि कीजो  ्



Wednesday, May 2, 2018

Iam Back- गजाला करीम

जासूसी उपन्यास जगत में एक और हलचल

लगभग दस वर्ष की खामोशी के पश्चात गजाला अपने उपन्यास के साथ लौट रही है।

उपन्यास नाम- iam Back

प्रकाशन- 3 मई 2018

फाॅरमेट- इ बुक

प्रकाशक- प्राची डिजीटल पब्लिकेशन- मेरठ

बुक्स प्राप्ति के लिए यहाँ क्लिक करें- iam Back- playstor